Skip to main content

"ब्रह्म-मुहूर्त उपदेश"

गुरू व आध्यात्मिक शास्त्रों का श्रध्दापूर्वक सुनना या पढ़ना ही सत्सँग करना है, जोकि केवल मनुष्य योनि में ही सम्भव है, जिसके निरंतर करते रहने से ही भगवान रुपी मंजिल का ज्ञान होता है, गुरु या शास्त्र भी हमें केवल रास्ता ही दिखाते हैं, यदि मनुष्य इन रास्तों पर चलता ही नहीं, तो मंजिल को कभी नहीं पा सकता. देखिए, इतनी छोटी सी बात है, जो अक्सर मनुष्य को मरते दम तक समझ में नहीं आ पाती ? ...सुधीर भाटिया फकीर

Comments

Popular posts from this blog

"भोजन/TI+FF+IN《《《《《 मनु" + "ष्य ????? भजन/शास्त्र" -[कक्षा-2591]-सुधीर भाटिया फकीर-20-09-2024

 

वि+वाह =कारण-शरीर/सँस्कार+सूक्ष्म-शरीर/मन, स्थूल-शरीर/भोग?●तलाक●[कक्षा-2595]सुधीर भाटिया फकीर22-9-24

 

आपके जीवन का गणित:- शुद्ध कमाई ?? ऋण/तमो, शून्य/रजो, बचत/सतो-[कक्षा-2657]-सुधीर भाटिया फकीर-23-10-24